ज्ञानवापी का सीलबंद ‘सबूत’ वापस लेने से जिला जज का इनकार

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The decision of survey of every corner of Gyanvapi Masjid will not be removed by the Masjid Court Commissioner.

वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे का वीडियो लीक होने के मामले में आज चारों वादी महिलाओं ने अपना सीलबंद लिफाफा कोर्ट में सरेंडर करने की कोशिश की, लेकिन जिला जज ने वापस कर दिया।

एडवोकेट कमीशन की कार्यवाही वाला वीडियो-फोटो लीक होने के चलते चारों वादी महिलाएं जिला जज की अदालत में पहुंचीं और अपना सीलबंद लिफाफा सरेंडर करने लगीं।

वहीं न्यायलय ने इस मामले की भी जांच कराने के लिए कहा कि वीडियो लीक कैसे हुआ? वीडियो लीक केस की भी 4 जुलाई को सुनवाई होगी।

गौरतलब है कि कल शाम को चारों वादी महिलाएं सीता साहू, रेखा पाठक, लक्ष्मी देवी और मंजू व्यास को कोर्ट ने वीडियो फोटो का बंद लिफाफा सौंपा था, लिफाफा सौंपने के थोड़ी देर बाद ही वीडियो लीक हो गया था.

चारों वादी महिलाओं के मुताबिक, उनका सील पैक लिफाफा अभी तक खुला नहीं है लेकिन इसके बावजूद वीडियो लीक हुआ है।

जिसकी वजह से वह अपना सील पैक लिफाफा जिस हालत में कोर्ट ने उन्हें सौंपा था, आज वापस करने पहुंचीं, लेकिन कोर्ट ने वापस नहीं लिया।

इस बीच मुस्लिम पक्ष की ओर से वीडियो लीक होने का मामला जिला जज की अदालत में उठाया गया।

लीक वीडियो में क्या दिखा?

गौरतलब है कि कल यानी सोमवार को ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे की रिपोर्ट लीक हो गई थी।

आजतक के पास भी लीक हुआ वीडियो मिला था. इस वीडियो में ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने में मिली आकृति दिखी थी।

जिसे मुस्लिम पक्ष फव्वारा तो हिंदू पक्ष शिवलिंग बता रहा है, इस वीडियो को सर्वे टीम के फोटोग्राफर ने शूट किया था और कोर्ट को सौंपा हैं।

ज्ञानवापी के वजूखाने में पानी भरा हुआ था, जिसमें शिवलिंग जैसी आकृति का ऊपरी भाग दिख रहा था, जिसे मुस्लिम पक्ष फव्वारा बता रहा है।

वजूखाने से पानी हटाने के दौरान बनाया गया वीडियो लीक हुआ है, जिसमें नगर निगम के कर्मचारी पानी निकाल रहे हैं और आकृति बाहर आ रही है।

इसे देखकर हिंदू पक्ष का कहना है कि बाबा मिल गए, ये शिवलिंग है या फव्वारा? ये तय होना बाकी है।

लेकिन इसके शिवलिंग होने के पक्ष में जो एक बात कही जा रही थी कि वहां मौजूद नंदी की प्रतिमा शिवलिंग की तरफ देख रही है, तो वो भी सर्वे टीम ने इस वीडियो में रिकॉर्ड किया है।

हिंदू पक्ष का कहना है कि इसकी शेप शिवलिंग से काफी मिलती-जुलती है और यह शिवलिंग ही है।

दूसरी ये कि इस आकृति के ऊपर एक छेद भी दिखता है, जिसके आधार पर मुस्लिम पक्ष इसे फव्वारा बता रहा है।

लेकिन ये आकृति क्या वाकई शिवलिंग है…या सिर्फ फव्वारा है…जिसका शिवलिंग जैसी आकृति में होना महज एक संयोग है? ये वो सवाल हैं।

जिनके जवाब कोर्ट को तय करने हैं और कोर्ट आस्था पर नहीं सबूतों पर फैसले सुनाती है।