Aadhaar 2.0 की हो रही तैयारी, जानिए आपके आधार में क्या बदल जाएगा

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PVC AADHAR CARD

नई दिल्लीः भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सौरभ गर्ग ने मंगलवार को आधार को लेकर भविष्य की योजना बताई।

उन्होंने कहा कि प्राधिकरण ‘आंशिक सत्यापन’ को सक्षम बनाने वाले समाधानों पर गौर करने के लिए तैयार है। गर्ग ने ‘भारत डिजिटल सम्मेलन-2022’ को संबोधित करते हुए कहा कि UIDAI ऐसे समाधानों के बारे में उद्योग जगत की राय जानने को भी उत्सुक है।

उन्होंने कहा, ‘हम आंशिक सत्यापन पर भी गौर करने के लिए तैयार हैं। संभव है कि कुछ लोग सिर्फ उम्र की पुष्टि करना चाहते हों और उनका इससे ज्यादा जानकारी पाने का इरादा न हो.’ इस सम्मेलन का आयोजन इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने किया है।

आधार 2.0 की तरफ कदम बढ़ा रही संस्था

आधार कार्ड जारी करने वाली संस्था Aadhaar के अद्यतन संस्करण ‘आधार 2.0’ की तरफ कदम बढ़ा रही है और ब्लॉकचेन एवं क्वॉन्टम कंप्यूटिंग के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी गौर कर रही है।

यूआईडीएआई के प्रमुख ने कहा, ‘इन मुद्दों पर उद्योग जगत की राय जानने से ही पता चल पाएगा कि उनकी मांग किस तरह की है और हम उसके हिसाब से सुविधा मुहैया कर पाते हैं या नहीं।’

उन्होंने कहा कि सिर्फ किसी व्यक्ति के खास इलाके का निवासी होने की पुष्टि के लिए भी सत्यापन की जरूरत पड़ सकती है।

उन्होंने कहा कि इस तरह की सेवाएं देने के लिए प्राधिकरण ने अभी तक समाधान नहीं विकसित किए हैं, लेकिन इसके बारे में गौर करने के लिए तैयार है।

रोजाना हो रहे पांच करोड़ से ज्यादा सत्यापन

गर्ग ने कहा कि आधार नंबर के माध्यम से दैनिक स्तर पर पांच करोड़ से भी अधिक सत्यापन किए जा रहे हैं और हर महीने आधार-समर्थित भुगतान प्रणाली के जरिये 40 करोड़ से भी अधिक बैंकिंग लेनदेन किए जा रहे हैं।

उन्होंने ‘आधार 2.0’ का जिक्र करते हुए कहा कि इससे स्वचालित बायोमीट्रिक मिलान अधिक तेजी से किया जा सकेगा और यह अधिक सुरक्षित भी होगा।

उन्होंने कहा कि प्राधिकरण ब्लॉकचेन एवं क्वॉन्टम कंप्यूटिंग तकनीकों का अधिकतम फायदा उठाने के बारे में भी सोच रहा है।

गर्ग ने कहा, ‘हम देख रहे हैं कि ब्लॉकचेन से क्या मदद मिल सकती है और विकेंद्रित समाधान मुहैया कराने में क्या इसका कोई उपयोग किया जा सकता है? यह भविष्य के गर्भ में है लेकिन हमारी नजर इस पर है।

वहीं क्वॉन्टम कंप्यूटिंग के बारे में हमें यह देखना है कि इससे जुड़े क्या सुरक्षा समाधान लाए जा सकते हैं?’