कोई अदृश्य ताकत है जो समाधान नहीं होने दे रही | केंद्रीय कृषि मंत्री

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कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा है कि उन्हें दुख है कि किसान सिर्फ कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग करते हैं, जबकि इसके फायदों पर चर्चा भी नहीं करते हैं. 

आजतक के साथ विशेष बातचीत में नरेंद्र तोमर ने कहा कि कोई अदृश्य ताकत है जो चाहती है कि ये मसला हल नहीं हो. 

जब कृषि मंत्री से उन ताकतों का नाम पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा. नरेंद्र तोमर ने कहा कि बातचीत के अगले ही दिन किसानों का सुर बदल जाता है. 

हमारा काम है कि किसानों की समस्या को किसी भी प्रकार से हल करना. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों से बातचीत के लिए हमेशा तैयार है. 

वहीं किसानों को राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) के नोटिस भेजे जाने के मामले में कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा कि किसी भी चीज को किसान आंदोलन से जोड़ना सही नहीं है.

26 जनवरी को किसानों द्वारा प्रदर्शन का ऐलान किये जाने के सवाल पर कृषि मंत्री ने कहा कि गणतंत्र दिवस राष्ट्रीय त्योहार है. आंदोलन के लिए 365 दिन हैं.

जब किसान पंजाब में रेल की पटरियों पर आंदोलन कर रहे थे, तभी से प्रयास हैं कि उनकी समस्या का समाधान बातचीत के माध्यम से किया जाये.

सरकार ने इस बात का भी पूरा ध्यान रखा है कि इस आंदोलन में किसानों की प्रतिष्ठा को किसी प्रकार का आघात न लगे.

डेढ़ साल तक नये कृषि काननू को लागू न करने के सवाल पर कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार का कोई ईगो नहीं है. किसान आंदोलन पर बैठे हैं. उनके मान सम्मान का पूरा ध्यान रखा गया है.

उन्होंने कहा कि पूरा विश्वास है कि बातचीत से समस्या का सामधान निकल ही आयेगा. किसान आंदोलन से आने वाले चुनाव पर कितना असर होगा, इस सवाल को लेकर उन्होंने कहा कि हर चीज को वोट से तोलना गलत है.

पीएम मोदी ऐसे नेता हैं, जो वोट की परवाह किये बिना देश हित के लिए निर्णय करते हैं. यदि वोट की परवाह की होती, तो कश्मीर में धारा 370 समाप्त करने के लिए इंतजार करते.

रैली की ताकत किसी भी दिन दिखा सकते हैं, लेकिन 26 जनवरी इसके लिए उपयुक्त दिन नहीं है. उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे इस रैली के लिए कोई और दिन निश्चित करें.

वहीं उन्होंने कहा कि मुझे ये भी विश्वास है, कि किसान यदि किसान 26 जनवरी को किसी प्रकार का आंदोलन करते भी हैं, तो ये आंदोलन पूरी तरह अनुशासित होगा.

इन कानूनों को नये सिरे से बनाना उचित नहीं है. किसानों से हो रही बातचीत और फैसले को लेकर गेंद किसके पाले में हैं, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि कृषि मंत्रालय और किसानों के बीच एक दौर की बातचीत हुई है.

इस धारा के समाप्त होने के बाद जम्मू कश्मीर में अब हालात बदल गये हैं. वहां हाल ही में चुनाव भी हुए. वहां विकास की लहर दौड़ रही है.

इसीलिये जब कृषि सुधार कानूनों की बात आई, तो पीएम मोदी ने कोई परवाह नहीं की और किसान हित के लिये ये तीन नये कानून लाये.

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