सुप्रीम कोर्ट ने लगाई जहांगीरपुरी में बुलडोजर पर रोक, जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका पर अब कल सुनवाई

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Supreme Court bans bulldozers in Jahangirpuri, hearing on Jamiat Ulema-e-Hind's petition tomorrow

Supreme Court Bans Bulldozers in Jahangirpuri | दिल्ली के जहांगीरपुरी में फिलहाल नहीं चलेगा बुलडोजर, किसी तरह की तोड़फोड़ नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को लेकर इलाके में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने इस मामले को लेकर दो दिन पहले एक याचिका दायर की थी, जिसमें यूपी, एमपी और गुजरात की संपत्तियों पर बुलडोजर चलाने की बात कही गई थी।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से कहा गया कि जहांगीरपुरी मामले को भी इसमें शामिल किया जाए और तत्काल सुनवाई की जाए।

मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने एमसीडी के इस कदम को असंवैधानिक, अनैतिक और अवैध और मनमाना करार दिया और इसे रोकने और पीड़ित पक्ष को सुनने का आग्रह किया।

दवे ने कहा कि नोटिस कम से कम 10 दिन पहले दिया जाना चाहिए था। अचानक आदेश देकर 24 घंटे से भी कम समय में यह कार्रवाई अमानवीय और अनुचित है।

वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने देश भर के कई राज्यों में चलाए जा रहे बुलडोजर की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर मुख्य न्यायाधीश की अदालत में जल्द सुनवाई का जिक्र किया, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मेंशनिंग के दौरान प्रतिबंधीत अंतरिम आदेश दिया।

अब मामले की अगली सुनवाई गुरुवार यानी कल होगी. वहीं याचिकाकर्ताओं के वकील एडवोकेट शाहरुख आलम ने दिल्ली हाई कोर्ट को जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजिंग पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।

इसके बाद कार्यवाहक सीजे विपिन सांघी ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट को इस मामले की जानकारी है तो हम इस पर सुनवाई नहीं करेंगे।

आपको बता दें कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में दो अर्जी दाखिल की हैं। एक याचिका देश के कई राज्यों में दायर की गई है।

जिसमें कहा गया है कि बुलडोजर मानवाधिकारों और बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन है, जबकि दूसरी याचिका जहांगीरपुरी में बुलडोजर चलाने के आदेश के बाद दायर की गई है.

जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से दलील दी गई है कि कानून के तहत अपराध के आरोपी की संपत्ति पर बुलडोजर चलाना जायज नहीं है।

कानूनी प्रक्रिया का पालन कर अतिक्रमण हटाया जा सकता है लेकिन जब तक पूरी प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता है तब तक आरोपी की संपत्ति पर बुलडोजर नहीं चलाया जा सकता।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से राज्यों को यह आदेश देने का अनुरोध किया गया है कि बिना कोर्ट की अनुमति के किसी का भी घर या दुकान नहीं गिराया जाएगा।

याचिका में केंद्र सरकार के साथ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात की सरकारों को पक्षकार बनाया गया है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से इमदादी कमेटी के सचिव गुलजार अहमद आजमी ने याचिका दायर की है।

अमित शाह को भी लिखा पत्र

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से पहले गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र भी लिखा था।

इस पत्र में उन्होंने अमित शाह से कहा है कि अब खरगोन में मुस्लिम घरों और अन्य संपत्तियों पर बुलडोजर चलाए जा रहे हैं, जो चिंता का विषय है। पत्र में कहा गया कि मुसलमानों की संपत्तियों को निशाना बनाया जा रहा है।

आपको बता दें कि पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ बुलडोजर से कार्रवाई चल रही है। इसमें बुलडोजर की मदद से उनकी अवैध संपत्तियों को तोड़ा गया।

अब इस महीने मध्य प्रदेश के खरगोन में जब रामनवमी पर हिंसा हुई तो उसके बाद वहां भी ऐसा ही किया गया, इसके बाद गुजरात से भी ऐसी ही तस्वीरें सामने आईं।

बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ आवाज भी उठाई जा रही है। विपक्षी दलों आदि का कहना है कि निर्दोष और दोषियों के साबित होने से पहले ही इसमें कार्रवाई की जा रही है।